April 2 Trump Tariffs: वैश्विक अर्थव्यवस्था और U.S. व्यापार संबंधों पर 5 प्रमुख प्रभाव

April 2 Trump Tariffs: ट्रम्प के प्रतिवर्ती शुल्कों का वैश्विक प्रभाव

2025 के 2 अप्रैल को, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प “reciprocal tariffs” (प्रतिवर्ती शुल्क) लागू करने जा रहे हैं, जो सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर प्रभाव डालेंगे। यह शुल्क उन देशों द्वारा अमेरिकी वस्त्रों पर लगाए गए शुल्क के बराबर होंगे, ताकि व्यापार असंतुलन को ठीक किया जा सके और विदेशी कंपनियों को घरेलू रूप से उत्पाद निर्माण करने के लिए प्रेरित किया जा सके। इस कदम का उद्देश्य दुनिया भर के व्यापार प्रथाओं में समानता और निष्पक्षता लाना है।

ट्रम्प के प्रतिवर्ती शुल्कों के मुख्य बिंदु:

  1. वैश्विक लागू होने वाला शुल्क: यह शुल्क सभी देशों पर लागू होंगे, जिसमें ऑटो आयात पर 25% शुल्क और कनाडा तथा मैक्सिको पर पहले से स्थगित किए गए शुल्कों को फिर से लागू किया जाएगा। इससे अमेरिकी उद्योगों को विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का समान अवसर मिलेगा।
  2. उद्देश्य: इन शुल्कों का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी वस्त्रों पर जो शुल्क लगाए गए हैं, उनका प्रतिशोध उसी स्तर पर किया जाए। इसका मकसद यह है कि विदेशी कंपनियां अमेरिकी सामानों की समान कीमत पर शुल्क ना लगाएं। इससे व्यापारिक असंतुलन को संतुलित किया जा सके।
  3. कार्यान्वयन की तारीख: ट्रम्प के प्रतिवर्ती शुल्क 2 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होंगे, जैसा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र के दौरान घोषणा की थी।
Reciprocal Tariffs

अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका:
    • आर्थिक वृद्धि: वित्तीय संस्थाएं चिंतित हैं कि यह शुल्क अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर ले जा सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि अगले एक वर्ष में अमेरिका में मंदी आने की 35% संभावना है। यह नीतिगत अनिश्चितताओं और बढ़ी हुई महंगाई के कारण हो सकता है।
    • शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव: वैश्विक शेयर बाजारों में इस कदम के कारण भारी गिरावट देखी गई है। मार्च 2025 में, S&P 500 ने 5.7% की गिरावट दर्ज की, जो दिसंबर 2022 के बाद से उसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी।
    • कॉर्पोरेट आय: बार्कलेज ने एस एंड पी 500 के लिए अपना सालांत लक्ष्य 5,900 तक घटा दिया है, जो प्रमुख बैंकों में सबसे कम है। यह अनुमान अमेरिकी व्यापार पर इन शुल्कों के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करता है।
  • भारत:
    • GDP पर प्रभाव: गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि अमेरिका के प्रतिवर्ती शुल्कों के कारण भारत का GDP 0.1 से 0.6 प्रतिशत तक घट सकता है।
    • निर्यात में चुनौतियाँ: भारत के प्रमुख निर्यात, जैसे फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, और आईटी सेवाएं, अमेरिकी बाजार में उच्च शुल्क के कारण प्रभावित हो सकती हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
  • अन्य देशों पर प्रभाव:
    • व्यापारिक संबंध: यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील और मैक्सिको जैसे देशों पर यह शुल्क लागू हो सकते हैं, जिनकी पहचान ट्रम्प ने उन देशों के रूप में की है जिन्होंने अमेरिकी वस्त्रों पर उच्च शुल्क लगाए हैं। इससे व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और प्रतिशोधी कदम उठाए जा सकते हैं।
    • आर्थिक अनिश्चितता: इन शुल्कों के लागू होने से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे निवेशकों का विश्वास कमजोर हो सकता है और उभरते हुए बाजारों से पूंजी का बहाव हो सकता है।
Reciprocal Tariffs

निष्कर्ष:

अमेरिका द्वारा लागू किए गए प्रतिवर्ती शुल्क वैश्विक व्यापार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। जबकि इसका उद्देश्य व्यापार असंतुलन को ठीक करना और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना है, यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का कारण बन सकता है। ट्रम्प के इन प्रतिवर्ती शुल्कों से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव और आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकते हैं। इन शुल्कों को लागू करने से व्यापारिक असंतुलन को सही किया जा सकता है, लेकिन यह कदम अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण जोखिमों को भी जन्म दे सकता है।

Leave a Comment